Friday, 3 July 2015

Swathisthan...[Harara / Sacral ]Chakra....... The second chakra is located in the abdomen, lower back and sexual organs are related to the element water and to emotions and sexuality. It connects us to others through feeling, desire, sensation, and movement. Ideally this chakra brings us fluidity and grace, depth of feeling, sexual fulfillment and the ability to accept change. Sanskrit Name: Swadhisthana Meaning: sweetness Location: Sacral Plexus- lower abdomen Body Parts: womb, genitals, kidney, bladder, circulatory system Glands: ovaries, testicles Function: emotional release, sexuality, pleasure, procreation Element: water Color: orange Balanced Characteristics: ability to experience pleasure, emotionally balanced, healthy, sex life, nurturance of self and others, graceful movement Deficiency: denial of pleasure, emotionally numb, fear of sex, rigidity in bod and attitudes, lack of desire, passion and excitement Excess: pleasure addiction, excessively strong emotions, ruled by emotions, sexual addiction, seductive manipulation Physical Malfunctions: disorders of reproductive organs, spleen, bladder, kidneys. Menstrual difficulties, lower back pain, knee trouble deadened senses-loss of appetite for food, sex, life. Sexual Dysfunction-impotence, frigidity, non-orgasmic. Healing Strategy: movement, emotional release or containment as appropriate healthy pleasures Kew Words: sexual, sensual, pleasure, feel, senses, flow, water, fluid, desire, connection, feminine, nurturance, movement Affirmations: I make my decisions from a place of hope and faith My creative drive is strong and exciting My sexuality is fulfilling and meaningful I am Life.


Saturday, 27 June 2015

Friday, 26 June 2015

PRANIC HEALING FOR ASTHMA, CHANDIGARH, INDIA...

Self help tips for Asthma....
.Asthma is an inflammatory disease of the lungs . 
DIET....
Inflammatory diseases such as asthma may be linked with an imbalance of dietary fats, interaction between genes, immune system, 21 century diet and life style. 
Tip
Consume more omega 3s, found in:
Oily fish (two to four portions per week)
Omega 3 fish oil supplements.
Cut out excess omega 6s by consuming less:
Omega 6 vegetable oils such as safflower oil, grape-seed oil, sunflower oil, corn oil, cottonseed oil or soybean oil. Replace with healthier oils such as olive, walnut, almond, avocado, hempseed or macadamia oils.
.AN APPLE A DAY…
People with a high intake of fruit and vegetables have better lung function and are less likely todevelop asthma than those who eat little.
Apples, for example, are a rich source of powerful antioxidants, including quercetin, which reduces histamine release and promotes bronchial relaxation. Those who drink apple juice from concentrate at leastonce a day, or who eat five or more apples per week are up to half as likely to experience asthma as non-apple eaters.
Tips...
1 Eat plenty of raw fruit and vegetables for their vitamin, mineral, antioxidant and fibre content. Antioxidants can help to strengthen lung tissue, reduce inflammation and improve asthma symptoms. Eat fruit and vegetables raw or steamed where appropriate.1. Avoid exposure to allergens such as pollen and dust.
2. Avoid eating foods to which you are allergic. Some of the common foods to which most of them show allergic reactions include fish and yeast.
3. Restrict or even avoid the foods will increase the problem of mucus secretion.
4. Avoid fried foods and foods that are hard to digest.
5. Drink plenty of water. This will not only ease the digestion but also helps to reduce the formation of highly thick mucus.
6. Deep breathing and Anulom- Vilom prayanam daily .
7.By Learning which triggers can cause your asthma symptoms to flare up and avoid them.
8.Using controller medicines correctly, as prescribed by your physician
9.Having a written asthma action plan, which can help you to take charge and keep track of your asthma symptoms.
10.Do Chakra healing daily , if you know energy healing, it helps to boost immunity, heal lungs .

Friday, 19 June 2015

प्रेम , भाषा की दृष्टि से देखें तो परम् शब्द से बना है प्रेम । परम् का अर्थ है जिसमें कोई दूषितता न हो अर्थात् शुद्धतम् ,और सर्वोच्च , जिसकी कोई सीमा नहीं,या जो असीम है ।जिस चक्र का यहाँ वर्णन किया है उसका संस्कृत नाम है "अनहद" अर्थात् जिसकी कोई हद न हो या कोई सीमा न हो ,जो असीम हो ,यहाँ भगवन का निवास भी है।इसीलिए श्रीमद् भगवद्गीता के अध्याय -10 के श्लोक - 20 के द्वारा भगवन ने समझाया है कि :- अहमात्मा गुडाकेश सर्भूताशयस्थित: ।अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ।। अर्थात् हे अर्जुन ! मैं सभी प्राणीयों के हृदय में स्थित सबका आत्मा हूँ तथा सबका आदि, मध्य, और अंत भी मैं ही हूँ ।.......by Dr.Surendra Nath Panch Ji, on Anhad Chakra


ध्वनि और सात चक्र ================ ऊर्जा का ध्वनि रूप कभी नष्ट नहीं होता । आज भी विज्ञान कृष्ण की गीता को आकाश से मूल रूप में प्राप्त करना चाहता है । ध्वनि की तरंगे जल तरंगों की तरह वर्तुल (गोलाकार) रूप में आगे बढ़ती हैं । सूर्य की किरणें सीधी रेखा में चलती हैं, इनका मार्ग कोई भी अपारदर्शी माध्यम अवरुद्ध कर सकता है । जल तरंगें जल तक ही सिमित रहती हैं । लेकिन ध्वनि तरंगों को कोई माध्यम रोक नहीं पाता है । गर्भस्त शिशु भी ध्वनि स्पंदनों ग्रहण कर अभिमन्यु बन जाता है । प्रकृति ने शरीर को सात धातुओं में, सात चक्रों में , सप्तांग गुहाओं में श्रेणीबद्ध किया है ।ध्वनि को भी सात सुरों से अलंकृत किया है । सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड जो की ध्वनि अर्थात नाद पर ही आधारित है, सात ही लोकों में बटा हुआ है ।यथा: भु - भुव: - स्व: - मह: - जन: - तप: - सत्यम् ।शरीर के सात चक्रों की तुलना भी इन सात लोकों से की गयी है । जैसे सृष्टि और प्रकृति में संतुलन जरुरी है, उसी प्रकार शरीर तथा चक्रों में संतुलन आवश्यक है ।प्रत्येक चक्र पर वर्णमाला के वर्ण भी अभिव्यक्त होते हैं। इन वर्णों का , सात सुरों के स्पंदनों का चक्रों से विशिष्ठ सम्बन्ध होता है । दूसरी ओर प्रत्येक चक्र से शरीर के कुछ अवयव जुड़े हुए हैं । चक्र शरीर के विशेष शक्ति केंद्र हैं , अत: इनसे ही , आश्रित अवयवों की क्रियाओं का नियंत्रण होता है । अवयवों के रोगग्रस्त होने की दशा में चक्रों का संतुलन भी बिगड़ जाता है । चक्रों का सीधा सम्बन्ध हमारे आभामंडल से होता है । इसी आभामंडल से हमारा मन निर्मित होता है । आभामंडल अपने चारों ओर के वायुमंडल से ऊर्जाएं ग्रहण करता है । यहाँ से सारी ऊर्जाएं चक्रों से गुजरती हुई विभिन्न अंगों , स्नायु कोशिकाओं में वितरित होती है । मूलाधार और सहस्त्रार को छोड़कर सभी चक्र युगल रूप में होते हैं । एक भाग आगे की ओर तथा दूसरा भाग पीठ की ओर । साधारण अवस्था में सभी चक्र घड़ी की दिशा में घूमते हैं । हर चक्र की अपनी गति होती है । इसमें होने वाले स्पंदनों की आवृति ( frequency ) के अनुरूप ही चक्र का रंग होता है । चक्र का आगे वाला भाग गुण - धर्म से जुड़ा है । पृष्ठ भाग गुणों की मात्रा , स्तर और प्रचुरता से जुड़ा होता है । युगल का संगम रीढ़ केंद्र होता है । जहाँ इडा - पिंगला भी मिलती हैं । यही केंद्र अंत:स्रावी ग्रंथि (endocrine gland) से जुड़ा होता है । अनंत आकाश से तथा सूर्य से आने वाली ऊर्जाएं हमारे आभामंडल और चक्रों के समूह के माध्यम से हमारे स्थूल शरीर में प्रवेश करती है । अंत:स्रावी ग्रंथियों के नाम एवम् स्थान:- ======================== चक्र ग्रंथि स्थान --------- ----------- -------------- 7 सहस्त्रार पीनियल कपाल 6 आज्ञा पिच्युटरी (पीयुशिका) भ्रूमध्य 5 विशुद्धि थायराईड (गलग्रंथी) कंठ 4 अनाहत थायमस (बाल्य ग्रंथि) ह्रदय 3 मणिपूर पेनक्रियज (अग्नाशय) नाभि 2 स्वाधिष्ठान एड्रिनल ( जनन ग्रंथि) पेडू 1 मूलाधार गोनाड (अधिब्रक्क) रीढ़ का अंतिम छोर कार्य क्षेत्र ======= सहस्रार - ऊपरी मस्तिष्क, दाहिनी आँख, स्नायु तंत्र, शरीर का ढांचा, आत्मिक धरातल, सूक्ष्म ऊर्जा सइ सम्बन्ध, पूर्व जन्म स्मृति आदि । भ्रूमध्य - ग्रंथियों की कार्य प्रणाली, प्रतिरोध क्षमता, चेहरा तथा इन्द्रियों के कार्य, अंत:चक्षु , चुम्बकीय क्षेत्र, प्रज्ञा आदि । विशुद्धि - स्वर यंत्र , श्वसन तंत्र , अंत:श्रवण, टेलीपेथी, अंतर्मन आदि । अनाहत - रोग निरोधक क्षमता, ह्रदय, रक्त प्रवाह , दया - करुणा का केंद्र, अन्य प्राणीयों के प्रति सम्मान भाव आदि । मणिपुर - पाचन तंत्र, यकृत, तिल्ली , नाड़ी तंत्र , आंतें , बायाँ मस्तिस्क, बौद्धिक विकास आदि । स्वाधिष्ठान - प्रजनन तंत्र, गुर्दे , मूत्र , मल, विष विसर्ज्ञन, भावनात्मक धरातल, सूक्ष्म स्तर आदि । मूलाधार - विसर्जन तंत्र , रीढ़ , पैर ,प्रजनन अंग, जीवन ऊर्जा का मूल केंद्र, भय मुक्ति, शक्ति केंद्र । सातों केन्द्रों के रंग भी इन्द्रधनुष के रंगों के क्रम में होते हैं । हर रंग ध्वनि तरंगों की आवृति से बनता है । यह वैज्ञानिक तथ्य है । अत: हम ध्वनि तरंगों की आवृति नियंत्रित करके चक्र विशेष को प्रभावित कर सकते हैं । ध्वनि की अवधारणा में शब्द और भाव संगीत पर सवार होते हैं । अलग-अलग श्रेणी के शब्द जब संगीत की लय , ताल , और स्वर से मिलते हैं, तब विभिन्न चक्रों पर उनका प्रभाव भिन्न - भिन्न होता है । अस्वस्थ व्यक्ति के चक्रों का स्वरुप असंतुलित होता है । गति, आवृति, रंग, आभामंडल आदि संतुलित नहीं होते । तब संगीत की लय, भावनाओं के साथ जुड़कर संतुलन को ठीक करने का क्रम शुरू किया जाता है । कई बार रोग की स्थिति में असंतुलित चक्र सूक्ष्म शरीर से ऊर्जा खींचकर स्वस्थ होने का प्रयास करता है । रंगों की तरह संगीत के सात सुर भी सातों केन्द्रों से जुड़े होते हैं । प्रत्येक स्वर की आवृति , ताल, भी हर चक्र की अलग-अलग होती है । शब्द, भाव और ध्वनि अविनाभाव( आपस में संयुक्त ) होते हैं ।एक को बदलने पर शेष दोनों भी बदल जाते हैं । ध्वनि की एक विशेषता यह है कि ये चारों ओर फैलती जाती है । प्रत्येक व्यक्ति के शरीर से गुजरती जाती है । इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति की ध्वनि भी हमारे शरीर से गुजरती रहती है । अत: हर व्यक्ति एक दूसरे को परिष्कृत करता जाता है । शब्द और ध्वनि मिलकर भावनाओं को ऊर्ध्वगामी बनाते हैं । इसी के साथ संगीत के सुरों का क्रम गहन से गहनतम होता जाता है । व्यक्ति खो जाता है । संगीत के स्पंदन और उसका गुंजन मणिपुर चक्र के माध्यम से शरीर में फैलता है । गर्भस्थ शिशु के साथ माँ का संवाद नाभि के जरिये ही बना रहता है । सातों सुरों का प्रभाव सीधा भी भिन्न-भिन्न केन्द्रों पर पड़ता है । नीचे मूलाधार पर "सा " , स्वाधिष्ठान पर " रे " , मणिपूर पर " ग " , अनाहत पर " म " , विशुद्धि पर " प " , तथा आज्ञा चक्र पर " ध " , के साथ सहस्त्रार पर " नि " का प्रभाव अलग-अलग सुर-लय के साथ पड़ता रहता है । मूलाधार शरीर की ऊर्जाओं का केंद्र है । ताल के साथ तरंगित होता है । तबला, ढोल, मृदंग जैसे संगीत पर थिरकता है । स्वाधिष्ठान भावनात्मक धरातल मूलाधार तथा मणिपुर के साथ स्पंदित होता है । लय हमेशां भावनात्मक भूमिका में कार्य करती है । अत: ऊपर अनाहत को भी प्रभावित करती है । विशुद्धि और अनाहत भीतरी सूक्ष्म शक्तियों का मार्ग खोलते हैं । आज्ञा-सहस्त्रार आत्मिक धरातल का संतुलन, शरीर-मन-बुद्धि का संतुलन , दृश्य-द्रष्टा भावों के प्रतिमान हैं । इनमें सुर-ताल-लय के साथ भावों का जुड़ना जरुरी है । विश्व भर में आज संगीत चिकित्सा की बहुत चर्चा है । संगीत चिकित्सा के अनुसार ताल शारीरिक और सुर भावनात्मक क्षेत्र को तथा लय बद्धता अंत:क्षेत्र को प्रभावित करते हैं । ध्वनि प्रत्येक चक्र की ऊर्जाओं को संतुलित करते हुए व्यक्ति को मन-वचन-शरीर से निरोग व आस्थावान बनाये रखती है।


Monday, 15 June 2015

MAGNIFIED HEALING CHANDIGARH...

‘Kwan Yin’ is the Goddess of Mercy. The energy which heals is “Gods’ most high Universe”. At the center of the heart three flames; pink, gold and blue helps to transform you with Divine Love, Divine Wisdom and Divine Power.
Magnified healing helps in:
1) Alignment of spiritual centers and clearing of light channels.
2) To increase the energy in hands.
3) To sensitize, awaken, revive and connect the nervous system
4) To heal the body and stimulate the calcium in the spine.

5) Healing of Karma and expansion of Three Fold Flame.

Saturday, 13 June 2015

DR.VANDANA RAGHUVANSHI...PRANIC HEALER CHANDIGARH, INDIA

Dr. Vandana Raghuvanshi
Director Energy Healing Guidance
Surgeon, Past Life Regression & Hypnotherapist,
Neuro-Linguistic Program(NLP) Therapist
Reiki Grand Master & Pranic Healer.
Power of Subconscious Mind Trainer
Magnified healer and Teacher
Crystal Healer
Dowsing Teacher and Dowser
Teacher for Crystal ball gazing
Trainer for Forgiveness
World class trainer for how to attract abundance
EFT/ ERT[Emotional release therapy ] Trainer
Medical Vedic astrologer
Writer
Chandigarh
India.
mobile..09872880634
mail..lightdivine28@yahoo.com
PRACTICE:

· >Past life regression & hypnotherapy:   Successfully doing past life regression, children’s past life        sessions,
 > past life therapy for phobia, depression, anxiety, panic attacks, sadness unexplained
  physical health problems, relationship issues, spiritual advancement, guidance from    master.
> LBL (Life between Lives) session, age regression, anti natal (in womb) regression, Inner child healing, >Re-Birthing cleansing of  present physical body Aura and Chakra before regression,
 >SRT (Spirit Releasement Therapy)
. >As a spiritual healer she does healing work in Past Life Session for forgiveness and disconnection of disharmony cords, removal of negative energy from past life and SRT in past life therapy session

> NLP therapy for nail biting, bed wetting, goal setting, eating disorders and to increase confidence and NLP for sports person. 
> Hypnotherapy for phobia, alcohol, addictions, anxiety, stammering, stage fright, insomnia
·        TRAINING COURSES AND WORKSHOP *
*Teaching Reiki Level 1,2 Level
,3rd degree (Karuna Reiki),
 Mastership,
Grand mastership
magnified healing
, Dowsing,
 EFT (Emotional Release Therapy),
 Crystal ball gazing
, Activation of third eye,
 Crystal healing,
 Forgiveness healing,
 How to attract abundance  Workshop
Power of Subconscious mind.
·    Healing: facilties provides.....
Successfully
 doing
 Aura cleansing & aura healing
Distant healing
 Chakra cleansing, activating, radiating and balancing
Pranic healing for
 endocrine disorder healing example: PCOD, Infertility, Hypothyroidism, Diabetes, Asthma etc
.Karmic healing.
Healing as SRT
Healing for relationship issues
Healing for negative energy removal
Healing by three fold flame
Healing for group event
Emotional release therapy session
Healing for home and office for negative energy
ALL HEALING ON SKYPE
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